મંગળવાર, 1 નવેમ્બર, 2011

हादसे

हादसे
रक्तरंगी हादसों ने काम ये किया।
शारदा की साधना में रंग भर दिया॥

आसमाँ की चाह थी ना आसमाँ मिला।
.भूमि पर भी चैन मुझे लेने ना दिया॥

सात फेरे भूख से है प्यास से लीव ईन।
वक्त ने दो पाट को बीवी बना दिया॥

स्वप्नमाला से लदा मैं ले गया बारात।
एन मौके प्यार ने 'हाँ' को भुला दिया॥

बावफा ने बेवफा की अर्ज की कबूल।
बेवफाई का मुगट खुद ही पहन लिया॥

खोजता हूँ आज भी गम के किनारे को।
आस-तट कोई मुझे दिखाई ना दिया॥

सोचता हूँ मैं सदा तन्हाई में ये बात।
पीर ने क्या चित्त से सबकुछ मिटा दिया॥

लेटकर अपनी चिता पे गुनगुनाता हूँ।
आज मैंने मौत को दुल्हन बना दिया॥

पूजता है जिन्दगी की आँच को 'कुमार'।
स्वर्ण को निखार के कुंदन बना दिया॥
कुमार अमदावादी
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प्रेरणा

प्रेरणा हो प्रेरणा रहना।
शब्दों का झरना बनना॥
कुमार अमदावादी

दिल



आँख के तिल में दिल बस गया।
झील में इक नगर बस गया॥
कुमार अमदावादी

उड़ान

 बहुत सुंदर व रंगीन थी
बड़ा गुमान था जब हवा में थी
औरत की तरह मालिक के
ईशारोँ पर नाचती रही
... जाने किस किस को काटती रही
तरह तरह से काटा
लटकाके भटकाके रेस लगाके
कटी पतंगो को हवा में झोले खाते देख
खुश होती, ईधर उद्यर झूमती
उन की डावाडोल दशा पे खिलखिलाती
एक रोमांटिक पल में इक
बडे पतंग पर मोहित हो गई
उस से 'पेच' लड़ गया
कभी वो गोता लगाता कभी मैं
कभी मैं तन जाती कभी वो
तनातनी में 'गुत्थमगुत्था' हो गए
रसानंद में डूब गई, मगर....
मेरे नियंत्रक का ध्यान जरा सा चुका औ...र मैं उस के हाथ से फिसल गई
मैं 'कट' गई
अब मैं आसमाँ में अकेली थी
भरी महफिल में तन्हा
झोकोँ के साथ ईधर उधर होते होते
गगन से धरा की तरफ आने लगी
तनी पतंगे हाँसी उड़ाती रही
जब जमीं पे पहुँची लूटनेवाले मौजूद थे
मुझे लूटने के चक्कर में झीर झीर कर दिया
फिर किसी ने न उठाया
सड़क पे जहाँ गिरी
सामने दीवार पर लिखा था
'ईतने उँचे कभी न उड़ो कि गिरो तो झीर झीर हो जाओ'
कुमार अमदावादी
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आँखें


पिया झांको जरा ईन सूनी आँखों में
गुलाबी रंग भर दो नीली आँखों में
मंजिल को यूँ चाहा हमने
कि मंजिल आँखो मेँ बस गई
आँखों का जादू ऐसा है
मंजिल, जीवनसाथी बन गई
कुमार अमदावादी

पहल

पहल
पहल जो तुमने न की तो पीछे हम छुट जाएँगे
गर एसा हुआ प्यारे तो तुम से हम रूठ जाएँगे

ईतने भी नाजुक नहीँ कि छुने से हम टूट जाएँगे
गलतफहमी में मत रहो कि स्पर्श से रूठ जाएँगे

भँवरा न आया पास तो फिर कहाँ ये फूल जाएँगे
कांटो से जो डर गये तुम तो शर्तिया रूठ जाएँगे

चाहोगे गर बाहों में झुलाना शौक से झूल जाएँगे
झूलाने का मतलब जाना न समझा तो रूठ जाएँगे

आएँगे आप पास हमारे तो कुछ हम से लूट जाएँगे
पास आकर भी कुछ ना लूटा तो हम रूठ जाएँगे
कुमार अहमदाबादी

प्रेम हींडोला


जीया जीया जीया मेरा जीया ये चाहे
संग सैंया के झूलूं प्रेम हींडोले(2)
गोरी गोरी गोरी (2) तेरे जाने ना ईशारे
ईतने भी नादां नहीं सैंया तुम्हारे(2)...गोरी गोरी गोरीइइइ
...

अरे सुन मेरी गोरी तुजे बाहों में ले लूँ
बाहों में ले के तुजे झूला मैं झूलाउँ
ओ..मेरे प्यारे सैंया तेरी बाहों में आउँ
बा..हों में आ के तेरी फूली ना समाउँ
पिया मेरे जीया मेरा तूने चुराया
तू..ने पुकारा मैं दौड़ा चला आया....गोरी गोरी गोरीइइइ

ये प्रेम का झूला यूँ...झूले दोनों के
जो भी हमें देखेँ तो दिखे इक दोनों
ओ..बाहें ये तेरी है प्रेम हींडोला
बाहों में झूली यूँ तन सुध भूला
तनमन तेरे मेरे बन गए झूला
साँसे तेरी मेरी बन गई झूला...गोरी गोरी गोरीइइइ

इस प्रेम के झूले में झूल के सैंया
तुज में समा..के मंजिल पाई
मैंने जो खोया है तू..ने वो पाया
तूने जो खोया है मैं..ने वो पाया
खोना पाना पाना खोना रीत है पुरानी
रीत ये पुरानी लगे हमें भी सुहानी...गोरी गोरी गोरीइइइ