શનિવાર, 3 ડિસેમ્બર, 2011

દરબાર

દર્દના દરબારમાં આ કોણ આવ્યું?
પૂર આંખોની નદીમાં કોણ લાવ્યું?

રાજી છું લીલોતરા એકાંતમાં હું
યાદોને સળગાવી દેવા કોણ આવ્યું?

દિલનાં જખ્મો પર નમક ભભરાવવાનો,
હિટલરી આદેશ ક્યાંથી કોણ લાવ્યું?

બે ખબર મેં મેળવી એક જ ખબરમાં
આંસુ ઝરતી રસમલાઈ કોણ લાવ્યું?

લુગડાને જાહેરમાં ધોવાય? ના...તો
મેલ સઘળો ચેનલો પર કોણ લાવ્યું?

આંખને માની નગર વસવાટ કરવા
દેહ પાણીનો ધરીને કોણ આવ્યું?

પોતાના પગ પર કુહાડી મારનારા
પૂછે છે ઘાતક સુનામી કોણ લાવ્યું?
અભણ અમદાવાદી

सुंदर फूल


बहुत खूबसूरत है ये फूल, ईन्हेँ मैं तोड़ुं कैसे? 
अपने हाथों अपनी तकदीर मिटा दूँ कैसे? 
कुमार अमदावादी

કસુંબો

કસુંબો
એકાંતને જે કસુંબો બનાવી પી શકે છે
મેળા વિના મહેરામણને માણી શકે છે
અભણ અમદાવાદી

प्रतिभा

प्रतिभा
मुज वतन मां ज्ञान क्षेत्रे छे प्रतिभा एटली 
जो गणो तो व्योम ना सौ तारला ओछा पड़े
अभण अमदावादी

तस्वीर का भाग्य

तस्वीर का भाग्य
तस्वीर मेरी दिल से लगाए रखते हो
दुनिया देख न ले आँचल गिराए रखते हो
मुज से तो मेरी तस्वीर भाग्यशाली है
जिसे तुम सदा सीने से लगाए रखते हो
कुमार अमदावादी

शब्दकारी

शब्दकारी
नजर मेरी जिस जिस पन्ने पर फिरती है
हर शब्द हर वाक्य से अश्रुबूंद झरती है..नजर

सुहानी पलें नजर के समक्ष तैरती है
कल को आज मानूं आरजू कहती है
कैसे समजाउँ गुजरी कहाँ लौटती है
दर्द के मूल से कहानी जन्म लेती है..नजर

घायल यादों का तीर जब भी चुभता है
सूखे घावों से अब भी खून झरता है
नादानों के अलावा प्यार कौन करता है
नसीब के आगे हर कोई पानी भरता है..नजर

चंद पन्नोँ पर ही ईकरार लिखा गया है
बाकी के पन्नों पर प्यार को ठगा गया है
ठगे प्यार को ही शब्दों में ढाला गया है
ईसीलिये 'कुमार' को जिंदा रखा गया है..नजर
कुमार अमदावादी

गंगा का घर

गंगा का घर 
गंगा का है घर हिमाला
साजन गंगा का है सागर
रोज निकलती गंगा घर से
पिया से मिलने की खातिर
हर की पेडी पर वो रुकती
दो पल रुककर सुस्ता कर वो
पथ पर अपने आगे बढती
आखिर सागर में मिल जाती
घायल मेरा दिल हिमाला
भीगी आँखे हर की पेडी
गंगा का पथ गाल ये मेरे
दामन मेरा गहरा सागर
गंगा जिस में रोज है मिलती
अपनी हस्ती को है खोती
कुमार अमदावादी